40+ उम्र में IVF से प्रेग्नेंसी कितनी संभव? जानें अंडों की क्वालिटी का पूरा सच
40 वर्ष की आयु के पश्चात मां बनने की योजना बना रही महिलाओं के मन में अक्सर यह संशय रहता है कि क्या इस उम्र में गर्भधारण संभव है। चिकित्सीय अध्ययनों से सिद्ध हो चुका है कि 40 के बाद प्राकृतिक रूप से गर्भाधान में जटिलताएं और अंडों की संख्या व गुणवत्ता में कमी आती है। ऐसी स्थिति में असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी) जैसे इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) को एक प्रमुख विकल्प माना जाता है, परंतु इसकी सफलता भी कई महत्वपूर्ण जैविक कारकों पर निर्भर करती है।
30 वर्षों के गहन अध्ययन में बड़ा खुलासा, तकनीकों में सुधार के बावजूद जैविक सीमाएं कायम
शोधकर्ताओं द्वारा वर्ष 1991 से 2018 के मध्य हुए लगभग 12 लाख फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि बीते तीन दशकों में एआरटी की कुल सफलता दर 14.7 प्रतिशत से बढ़कर 28.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है। हालांकि, अध्ययन में यह स्पष्ट हुआ कि 40 की उम्र के बाद महिला के स्वयं के अंडों से आईवीएफ की सफलता दर तेजी से घटती है। 43 वर्ष या उससे अधिक आयु में अपने अंडों के जरिए सफलता की संभावना 5 प्रतिशत से भी कम रह जाती है, जबकि कम उम्र की महिला के डोनर एग्स का उपयोग करने पर सफलता की दर काफी स्थिर और बेहतर बनी रहती है।
महिला की उम्र बनाम अंडे की बायोलॉजिकल उम्र
विशेषज्ञों के अनुसार, महिला की कालानुक्रमिक (क्रोनोलॉजिकल) उम्र और उसके अंडों की बायोलॉजिकल उम्र में अंतर होता है। महिलाएं अपने जीवनभर के अंडों के साथ जन्म लेती हैं, जो पुरुषों के शुक्राणुओं की भांति नए नहीं बनते। जन्म के समय लड़कियों में 10 से 20 लाख अंडे होते हैं, जो किशोरावस्था तक घटकर 3 से 5 लाख रह जाते हैं। 20 से 30 वर्ष की आयु के बीच अंडों की गुणवत्ता सर्वोत्तम होती है, जबकि 35 वर्ष के पश्चात इनमें तेजी से गिरावट आती है, जिससे आनुवंशिक जटिलताओं और गर्भपात का जोखिम बढ़ जाता है।
आईवीएफ की सफलता के लिए जरूरी कारक और विशेषज्ञों का सुझाव
स्त्री रोग एवं प्रजनन विशेषज्ञों का कहना है कि आईवीएफ की सफलता केवल महिला की कुल आयु पर नहीं, बल्कि उसके गर्भाशय के स्वास्थ्य, शुक्राणुओं की गुणवत्ता, हार्मोनल संतुलन तथा जीवनशैली (जैसे मोटापा या धूम्रपान से दूरी) पर भी निर्भर करती है। अध्ययन के निष्कर्ष दर्शाते हैं कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकें भले ही उन्नत हुई हों, परंतु वे शरीर की प्राकृतिक सीमाओं को पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकतीं। अतः अधिक उम्र में सुरक्षित एवं सफल गर्भावस्था के लिए 'एग फ्रीजिंग' या 'डोनर एग्स' जैसे विकल्पों को अपनाना अधिक व्यावहारिक और प्रभावी साबित हो सकता है।
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