नागपंचमी पर मिलता है संतान सुख का आशीर्वाद, मंदिर में देवता साक्षात विराजमान!
नागपंचमी का त्योहार पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. इस साल 17 अगस्त को यह शुभ दिन आ रहा है. नागपंचमी पर खरगोन के सभी नाग और भिलट मंदिरों में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं. वहीं जिले की सीमा क्षेत्र में सतपुड़ा पर्वत की चोटी पर बना सैकड़ों वर्ष पुराना नागलवाड़ी भिलट मंदिर इस दिन विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है. निमाड़ क्षेत्र में प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल इस मंदिर में प्रमुख रूप से मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों से भी लाखों श्रद्धालु आते है. मान्यता है कि यहां भिलट देव साक्षात मौजूद हैं और भक्तों की हर मनोकामना को पूरी करते हैं.
यह धार्मिक स्थल शिखर धाम के नाम से भी प्रसिद्ध है. करीब 800 साल पुराने इस मंदिर को भिलट देव की कर्मभूमि माना जाता है. नागपंचमी के दिन सुबह से ही मंदिर में भक्तों की कतार लगने लगती है. मेले का भी आयोजन होता है. इस दौरान करीब 8 से 10 लाख श्रद्धालु दर्शन-पूजन करने और मेले में शामिल होने आते हैं. कहते हैं कि जो भी निःसंतान भक्त यहां मन्नत मांगता है, भगवान के आशीर्वाद से उसके घर में किलकारियां गूंजने लग जाती हैं.
800 साल पुराना मंदिर का इतिहास
पुजारी राजेंद्र बाबा लोकल 18 को बताते हैं कि भिलट देव मंदिर का इतिहास लगभग करीब 800 साल पुराना है. प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, भिलट देव का जन्म विक्रम संवत 1220 में मध्य प्रदेश के हरदा जिले में हुआ था. लेखक नागलवाड़ी उनकी कर्मभूमि रही है. उन्हें नाग देवता का अवतारी पुरुष माना जाता है. इसी वजह से नागपंचमी पर यहां पूजा-पाठ का विशेष महत्व है.
भगवान शिव की तपस्या से हुआ था जन्म
प्राचीन कथा के अनुसार, मेंदाबाई और रेलन नाम के दंपति ने संतान प्राप्ति के लिए भगवान शिव की तपस्या की थी. प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया लेकिन यह बालक ज्यादा समय तक उनके साथ नहीं रहा. जन्म के कुछ ही समय बाद भगवान शिव बालक को अपने साथ ले गए और उसकी जगह एक टोकरी में सांप छोड़ गए. उन्होंने सांप को ही अपना पुत्र मानकर उसकी पूजा शुरू कर दी. तभी से भिलट देव को नाग देवता से जोड़कर पूजा जाने लगा.
संतान सुख पाने के लिए आते हैं श्रद्धालु
क्षेत्र में भिलट देव को वरदानी बाबा भी माना जाता है. मंदिर में संतान सुख की मन्नत मांगने के लिए दूर-दूर से दंपति पहुंचते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से बाबा से मन्नत मांगने पर सूनी गोद भर जाती है. इसी आस्था के कारण नागपंचमी पर संतान की इच्छा रखने वाले लोगों की संख्या भी काफी रहती है. वहीं वे लोग भी आते हैं, जिनकी मन्नतें पूरी होती हैं. वे यहां आकर अपनी संतान का तुलदान करते हैं.
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