पाकिस्तान ने चीन से लगाई गुहार, जल युद्ध में हो शामिल, लेकिन क्या संभव है पानी रोकना?
इस्लामाबाद। भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद पाकिस्तान में बेचैनी बढ़ती जा रही है। पाकिस्तान के नेता और आम लोग अब अपने सदाबहार मित्र चीन से मांग कर रहे हैं कि वह ब्रम्हपुत्र नदी का जल यानी भारत का पानी रोक दे। सोशल मीडिया से लेकर टीवी डिबेट्स तक पाकिस्तान में यही चर्चा है कि चीन भारत की नदियों पर लगाम लगाकर उसे सबक सिखा सकता है। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा संभव है? और अगर चीन ऐसा करता भी है तो भारत पर उसका कितना असर होगा?
पाकिस्तान के कई विशेषज्ञ यह तर्क दे रहे हैं कि भारत की अधिकांश नदियां चीन से होकर निकलती हैं, और अगर चीन पानी रोकता है तो भारत प्यासा रह जाएगा। लेकिन सच्चाई यह है कि भारत की जल व्यवस्था बहुपरतीय है — भारत के भीतर ही दर्जनों नदियां बहती हैं और अधिकांश आबादी का जल स्रोत उन्हीं पर निर्भर है।
सिंधु नदी बेसिन के जल बंटवारे में भी भारत ने पाकिस्तान को 80प्रतिशत से ज्यादा पानी दिया था। इसके बावजूद, पाकिस्तान ने आतंकवाद का समर्थन कर भारत के धैर्य की सीमाएं पार कर दीं, जिसके चलते अब भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित किया है।
भारत-चीन संबंध और जल मुद्दा
जहां भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि जैसी कानूनी व्यवस्था थी, वहीं भारत और चीन के बीच ऐसा कोई बाध्यकारी जल-बंटवारा समझौता नहीं है। हां, बाढ़ के मौसम में ब्रह्मपुत्र नदी जैसे कुछ जलस्रोतों को लेकर जल-विज्ञान डेटा साझा करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) ज़रूर है। लेकिन कानूनी बाध्यता के अभाव में चीन स्वतंत्र है।
चीन ने तिब्बत के मेडोग क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र पर सुपर डैम बनाने की योजना बनाई है, जिससे पानी के प्रवाह को नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि, अगर चीन ब्रह्मपुत्र का पानी रोकता भी है, तो इसका प्रभाव मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश, असम और सिक्किम जैसे उत्तर-पूर्वी राज्यों पर पड़ेगा, न कि पूरे भारत पर। भारत की विशाल जल प्रणाली इसे देशव्यापी संकट से बचाए रखेगी।
पाकिस्तान की चीन से मदद की अपील को विश्लेषक उसकी किसी और को पिता बनाने की प्रवृत्ति करार दे रहे हैं। आतंकवाद के मामले में पाकिस्तान जितना दोषी है, उतना भारत चीन के लिए नहीं है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद जरूर हैं, लेकिन भारत चीन में आतंकवाद नहीं फैलाता और न ही उसकी घरेलू राजनीति में हस्तक्षेप करता है। इसलिए चीन के पास पाकिस्तान जैसा प्रतिशोध लेने का कोई नैतिक या रणनीतिक कारण नहीं है।
भारत की तैयारियां
विश्लेषकों का मानना है कि भारत इस संभावित चुनौती को लेकर भी तैयार है। अरुणाचल और असम जैसे राज्यों में तेजी से बांध निर्माण की परियोजनाएं शुरू हो रही हैं ताकि जल स्टोरेज बढ़ाया जा सके और आपात स्थिति में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इस प्रकार पाकिस्तान की चीन से मदद की उम्मीद एक मिथक से ज्यादा कुछ नहीं है।
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