सोनिया गांधी का बयान: महिला आरक्षण पर कांग्रेस स्पष्ट, राहुल गांधी की प्रतिक्रिया पर नजर
नई दिल्ली | लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक और प्रस्तावित परिसीमन बिल को लेकर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मेरी पार्टी अपनी स्थिति पहले ही स्पष्ट कर चुकी है, मुझे इसमें कुछ और जोड़ना नहीं है।लोकसभा में महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन आयोग के गठन से जुड़े तीन विधेयक पेश किए गए, जिनको लेकर सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने इन प्रस्तावित विधेयकों को असंवैधानिक करार देते हुए कड़ा विरोध जताया। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और अमित ने ये विधेयक पेश किए।
कांग्रेस महिला आरक्षण का पूर्ण समर्थन करती है
वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को इसे लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण का पूरी तरह समर्थन करती है और यह विधेयक 2023 में संसद से सर्वसम्मति से पारित होकर संविधान का हिस्सा बन चुका है।
मौजूदा प्रस्ताव को लेकर लगाए गंभीर आरोप
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार का मौजूदा प्रस्ताव महिला आरक्षण से जुड़ा नहीं है, बल्कि परिसीमन और गेरीमैंडरिंग के जरिए सत्ता हासिल करने की कोशिश है। गेरीमैंडरिंग का अर्थ है किसी विशेष राजनीतिक दल या समूह को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं को जानबूझकर बदलना।
जातिगत जनगणना के आंकड़ों को किया गया नजरअंदाज- राहुल
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ओबीसी, दलित और आदिवासी समुदायों के हिस्से में किसी भी तरह की हिस्सेदारी की चोरी नहीं होने देगी और जातिगत जनगणना के आंकड़ों को नजरअंदाज करने का विरोध करेगी। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि दक्षिण, पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और छोटे राज्यों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रस्तावित विधेयक में क्या?
प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक के अनुसार, 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले परिसीमन के बाद लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक की जा सकती है, ताकि महिला आरक्षण को लागू किया जा सके। इसके साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी 33 प्रतिशत महिला आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सीटों में बढ़ोतरी का प्रावधान किया गया है। विधेयक में यह भी कहा गया है कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में रोटेशन के आधार पर तय की जाएंगी।
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