UP में बड़ा फैसला: पूर्व विधायक समेत पूरे परिवार को मिली सजा
भदोही। रिश्तेदार के पुश्तैनी मकान पर गैरकानूनी तरीके से कब्जा करने और माइनिंग कंपनी को अपने दबाव में लेने के केस में भदोही की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश पुष्पा सिंह ने समाजवादी पार्टी और निषाद पार्टी के पूर्व विधायक विजय मिश्रा, उनकी पत्नी व पूर्व एमएलसी रामलली मिश्रा और बेटे विष्णु मिश्रा को 10-10 साल की कठोर सजा सुनाई है। इसके अलावा, उनकी बहू रूपा मिश्रा को 4 वर्ष के कारावास की सजा मिली है। यह पहला मौका है जब पूर्व विधायक की पत्नी, बेटे और बहू को किसी मामले में दोषी पाते हुए सजा दी गई है।
चारों दोषियों पर ₹5.26 लाख का आर्थिक जुर्माना
अदालत ने चारों अपराधियों पर कुल 5 लाख 26 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। इसमें विजय मिश्रा पर 1.76 लाख, रामलली पर 1.75 लाख, विष्णु मिश्रा पर 1.65 लाख और रूपा मिश्रा पर 10 हजार रुपये का जुर्माना शामिल है। जुर्माना न भरने की सूरत में दोषियों को अतिरिक्त समय जेल में काटना होगा। बता दें कि इससे दो दिन पहले ही प्रयागराज की अदालत ने एक हत्याकांड के मामले में विजय मिश्रा को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
895 दिनों तक चला मुकदमा, पेश किए गए 8 गवाह
इस पूरे मामले में पुलिस ने जांच पूरी कर 20 नवंबर 2023 को अदालत में चार्जशीट पेश की थी। लगभग 895 दिनों तक चली कानूनी कार्यवाही के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल आठ गवाहों को अदालत के सामने पेश किया। पुख्ता सबूतों और गवाहों के आधार पर ही अदालत ने यह सख्त फैसला सुनाया। साल 2020 में हुई गिरफ्तारी के बाद से ही विजय मिश्रा लगातार जेल में बंद है।
साल 2020 में दर्ज हुआ था मुकदमा
यह पूरा विवाद 4 अगस्त 2020 को शुरू हुआ था, जब विजय मिश्रा के रिश्तेदार कृष्ण मोहन तिवारी ने भदोही के गोपीगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप था कि विजय मिश्रा ने साल 2001 से ही उनके पैतृक घर पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा था और उनकी माइनिंग फर्म को भी जबरन अपने नियंत्रण में ले लिया था। इसके बाद 14 अगस्त 2020 को विजय मिश्रा को मध्य प्रदेश के आगर मालवा से गिरफ्तार किया गया था। बाद में जुलाई 2022 में उनके बेटे विष्णु मिश्रा को पुणे से पकड़ा गया था, जिस पर इनाम भी घोषित था।
अलग-अलग जेलों में बंद हैं दोषी
मौजूदा समय में विजय मिश्रा आगरा की जेल में और उनका बेटा विष्णु मिश्रा लखीमपुर खीरी की जेल में बंद हैं। इन दोनों की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराई गई थी। वहीं, कोर्ट परिसर में मौजूद रामलली मिश्रा और रूपा मिश्रा को फैसला आने के बाद तुरंत हिरासत में लेकर भदोही जिला जेल भेज दिया गया। अदालत ने अपने 62 पन्नों के फैसले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि विजय मिश्रा, रामलली और विष्णु ने समाज के खिलाफ गंभीर अपराध किया है, और रूपा मिश्रा ने भी उस अपराध की कमाई का फायदा उठाया है।
अदालत में नहीं चली उम्र और बीमारी की दलीलें
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने विजय मिश्रा और उनके परिवार के लिए कम से कम सजा की मांग करते हुए कई दलीलें दीं। वकील ने इसे राजनीतिक रंजिश के तहत फंसाने का मामला बताया। साथ ही पूर्व एमएलसी रामलली मिश्रा की 70 वर्ष की आयु और उनकी बीमारियों का हवाला दिया गया। बहू रूपा मिश्रा के दो छोटे बच्चों की परवरिश की बात भी कही गई, लेकिन कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया।
भावुक हुईं सास-बहू
जैसे ही एमपी-एमएलए कोर्ट ने सजा का ऐलान किया, रामलली मिश्रा और रूपा मिश्रा अदालत परिसर में ही रोने लगीं। वहां मौजूद रूपा की 12 साल की बेटी भी अपनी मां और दादी को रोता देख भावुक हो गई। इस संवेदनशील फैसले को देखते हुए कोर्ट परिसर के आसपास पुलिस की सुरक्षा बेहद सख्त रही।
पूर्व विधायक विजय मिश्रा को अब तक मिली सजाएं:
-
15 मई 2026: संपत्ति हड़पने के मामले में विजय मिश्रा, उनकी पत्नी और बेटे को 10-10 साल तथा बहू को 4 साल की जेल।
-
13 मई 2026: प्रयागराज एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा कचहरी हत्याकांड में विजय मिश्रा को आजीवन कारावास।
-
13 जून 2024: चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन मामले में एक महीने की साधारण जेल।
-
मार्च 2023: आर्म्स एक्ट (अवैध हथियार) के तहत 5 साल की सजा।
-
4 नवंबर 2023: एक गायिका के साथ दुष्कर्म के मामले में 15 साल की कैद।
CSK के खिलाफ आकाश सिंह का अनोखा जश्न बना चर्चा का विषय
न्याय प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की पहल, जबलपुर से शुरू हुआ नया बदलाव
LSG के खिलाफ अंशुल कंबोज के नाम दर्ज हुआ अनचाहा रिकॉर्ड
इंदौर-बुधनी रेल परियोजना से बदलेगी MP की कनेक्टिविटी, नई लाइन को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया
तनाव और खराब लाइफस्टाइल बढ़ा रहे हाइपरटेंशन का खतरा
ऑपरेशन ‘रेजपिल’ के तहत बड़ा खुलासा, करोड़ों रुपये की प्रतिबंधित ड्रग जब्त
भारत एआई में ग्लोबल हब बनने की राह पर: चंद्रशेखरन
आरक्षण मुद्दे पर सरकार पर बढ़ा दबाव, मनोज जरांगे ने दिया अंतिम अल्टीमेटम