सतना | मध्य प्रदेश के सतना जिले में सुंदरा से सिंहपुर कोठी-जैतवारा-सिमरिया मार्ग की खस्ताहाल और जर्जर स्थिति स्थानीय आबादी के लिए एक बड़ा नासूर बन चुकी है। पूरी सड़क गिट्टियों में तब्दील हो चुकी है और जगह-जगह बने जानलेवा गड्ढों के कारण किसानों, व्यापारियों, छात्रों और मरीजों का इस रास्ते से गुजरना दूभर हो गया है। यातायात के लिहाज से यह मार्ग अब पूरी तरह असुरक्षित हो चुका है और बारिश के मौसम में तो यहां से गुजरना साक्षात यमराज को न्योता देने जैसा हो जाता है।

तीन विधानसभाओं और प्रमुख तीर्थों को जोड़ने वाली जीवनरेखा

यह जर्जर मार्ग केवल एक साधारण रास्ता नहीं, बल्कि सतना जिले की रैगांव व चित्रकूट और रीवा जिले की सिमरिया विधानसभा को आपस में जोड़ने वाली मुख्य जीवनरेखा है। रोज हजारों की तादाद में ग्रामीण, विद्यार्थी और किसान अपने जरूरी कामों के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं। इसके अलावा, यह सड़क देश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों जैसे चित्रकूट, बिरसिंहपुर गैवीनाथ, मैहर धाम और कालिंजर किले को आपस में जोड़ती है। प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु और पैदल यात्री इस पवित्र पथ से गुजरते हैं, जिन्हें प्रशासनिक उपेक्षा के चलते पग-पग पर भारी दिक्कतों और खतरों का सामना करना पड़ता है।

हादसों में जा रही जानें और कागजी दावों पर उठे सवाल

स्थानीय निवासियों का कहना है कि बदहाल सड़क की वजह से यहां रोज गाड़ियां और ट्रक पलट रहे हैं, जिससे कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और दर्जनों लोग हमेशा के लिए दिव्यांग हो गए हैं। इसके अतिरिक्त, सड़क से उड़ने वाले धूल के गुबार के कारण आसपास के गांवों में सांस और अस्थमा के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष दिलीप मिश्रा ने कलेक्टर को शिकायती पत्र सौंपकर सड़क को तत्काल दुरुस्त करने की मांग की है। हालांकि, प्रशासन के उन दावों की हवा निकल गई है जिसमें 25 किलोमीटर सड़क पर पैचवर्क (मरम्मत) की बात कही गई थी, क्योंकि जमीनी हकीकत में केवल कुछ किलोमीटर ही काम हुआ है और बाकी सड़क वैसी ही उखड़ी पड़ी है।

मंत्री के क्षेत्र में बदहाली और विपक्ष का भ्रष्टाचार का आरोप

इस पूरे मामले में सियासी पारा भी चढ़ गया है, क्योंकि यह क्षेत्र रैगांव विधानसभा के अंतर्गत आता है और यहां की विधायक प्रतिमा बागरी वर्तमान प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री हैं। विपक्ष और जनता अब सीधे सवाल उठा रहे हैं कि सरकार में इतना बड़ा प्रतिनिधित्व होने के बाद भी क्षेत्र विकास के लिए क्यों तरस रहा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सड़क सुधार के नाम पर लाखों रुपये का कागजी घालमेल किया गया है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। एक तरफ जहां सरकार राज्य की सड़कों को विश्वस्तरीय बताती है, वहीं सुंदरा-सिमरिया मार्ग की यह जमीनी हकीकत दावों की पोल खोल रही है। अब क्षेत्र की जनता को खोखले आश्वासन नहीं, बल्कि एक सुरक्षित सड़क और जवाबदेही चाहिए।