मैदान से कोचिंग तक महिलाओं का जलवा, इन तीन क्रिकेटरों ने पुरुष क्रिकेट में बनाई जगह
क्रिकेट की दुनिया में पारंपरिक रूप से पुरुषों का वर्चस्व माना जाता रहा है, लेकिन अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। महिला क्रिकेट से जुड़ी कई पूर्व खिलाड़ी और विशेषज्ञ अपनी दक्षता के बल पर पुरुषों की पेशेवर क्रिकेट टीमों के कोचिंग और सपोर्ट स्टाफ में ऐतिहासिक भूमिकाएं निभा रही हैं।
सारा टेलर ने रचा इतिहास
इंग्लैंड की पूर्व विकेटकीपर सारा टेलर ने सीनियर पुरुष अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कोचिंग की जिम्मेदारी संभालकर एक नया इतिहास रचा है। उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए इंग्लैंड की पुरुष टीम का फील्डिंग कोच नियुक्त किया गया था। इस उपलब्धि के साथ वह सीनियर पुरुष अंतरराष्ट्रीय सेटअप में कोच बनने वाली पहली महिला बन गईं। इससे पहले वह अबू धाबी और मैनचेस्टर ओरिजिनल्स जैसी फ्रेंचाइजी टीमों के साथ भी काम कर चुकी हैं।
तेज और स्पिन गेंदबाजी में महिला विशेषज्ञों का दबदबा
इस बदलाव का एक और प्रमुख उदाहरण कैथरीन डाल्टन हैं, जिन्हें पाकिस्तान सुपर लीग की टीम मुल्तान सुल्तांस का तेज गेंदबाजी कोच बनाया गया था। पुरुषों की किसी बड़ी पेशेवर फ्रेंचाइजी में इस पद पर पहुंचने वाली वह पहली महिला हैं। उनके अलावा इंग्लैंड की पूर्व क्रिकेटर एलेक्स हार्टली ने भी इसी फ्रेंचाइजी के साथ स्पिन गेंदबाजी विशेषज्ञ कोच के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि कोचिंग में लिंग की बजाय तकनीकी समझ, अनुभव और संवाद कौशल अधिक मायने रखता है।
बैकरूम स्टाफ से लेकर वैश्विक खेल जगत तक भागीदारी
केवल मैदान पर ही नहीं, बल्कि बैकस्टेज और प्रबंधन स्तर पर भी महिलाएं अहम भूमिका निभा रही हैं। भारतीय पुरुष टीम के मीडिया और कंटेंट ऑपरेशंस में राजल अरोड़ा जैसी पेशेवर महिलाएं लंबे समय से जुड़ी रही हैं। इसके अलावा फिजियोथेरेपिस्ट, लॉजिस्टिक्स और मीडिया अधिकारियों के तौर पर भी महिलाएं पुरुष टीमों के साथ काम कर रही हैं। यह बदलाव केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है, बल्कि एनबीए में बेकी हैमन, एनएफएल में जेन वेल्टर और एनएचएल में जेसिका कैंपबेल जैसी महिला कोचों ने वैश्विक स्तर पर पुरुष खेल लीगों में अपनी अनूठी पहचान बनाई है।
बदलती सोच और भविष्य की संभावनाएं
पहले खेल जगत में संन्यास के बाद केवल पूर्व पुरुष खिलाड़ियों को ही कोचिंग में प्राथमिकता मिलती थी, लेकिन अब रणनीतिक कौशल, डेटा विश्लेषण और तकनीकी दक्षता को प्राथमिकता दी जा रही है। सारा टेलर, कैथरीन डाल्टन और अन्य महिला दिग्गजों की सफलता यह दर्शाती है कि पुरुष क्रिकेट और अन्य खेलों में महिला विशेषज्ञों के लिए दरवाजे तेजी से खुल रहे हैं, जो भविष्य में लैंगिक सीमाओं से परे खेल संस्कृति की एक नई शुरुआत का संकेत है।
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