भोपाल के बड़े तालाब में बोटिंग के दौरान नाव खराब, मची अफरा-तफरी
भोपाल: जबलपुर के बरगी डैम में हुए हालिया हादसे से सबक लेने के बजाय राजधानी भोपाल के बड़े तालाब में सुरक्षा नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। रविवार की शाम जब आसमान में तेज हवाएं चल रही थीं, तब भी पर्यटकों की जान जोखिम में डालकर नावों को पानी में उतारा गया। इस दौरान एक पैडल बोट बीच तालाब में अचानक खराब हो गई, जिससे उस पर सवार युवक-युवती गहरे पानी के बीच फंस गए। घबराहट और दहशत के माहौल के बीच नाविकों ने लहरों के बीच ही उनकी नाव बदलने का जोखिम भरा काम किया, जो किसी भी समय एक बड़े हादसे में बदल सकता था।
मौसम की चेतावनी को किया दरकिनार
हादसे के वक्त कुदरत के तेवर बेहद तल्ख थे, लेकिन बोट क्लब पर व्यावसायिक गतिविधियों को थामने की जहमत नहीं उठाई गई। मौसम विभाग के अनुसार उस समय हवा की गति 32 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई थी, जो सामान्य परिस्थितियों के मुकाबले दोगुनी से भी अधिक थी। इतनी तेज हवाओं में छोटी नावों का संतुलन बिगड़ने का खतरा बना रहता है, फिर भी सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर सैलानियों को तालाब के बीचों-बीच जाने की अनुमति दी गई।
बीच पानी में रेस्क्यू का जानलेवा जोखिम
जब पैडल बोट बीच तालाब में तकनीकी खराबी का शिकार हुई, तो वहां मौजूद सुरक्षा इंतजामों की पोल खुल गई। संकट में फंसे पर्यटकों को सुरक्षित किनारे लाने के बजाय, नाविकों ने तेज लहरों और हवा के थपेड़ों के बीच ही दूसरी नाव लाकर उन्हें शिफ्ट किया। लाइफ जैकेट और अन्य जीवन रक्षक उपकरणों की मौजूदगी के बावजूद, उफनते पानी के बीच नाव बदलने की यह प्रक्रिया सुरक्षा प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन है, जो प्रबंधन की घोर लापरवाही को उजागर करती है।
बरगी हादसे के बाद भी नहीं जागी प्रशासन की नींद
हैरानी की बात यह है कि मात्र तीन दिन पहले जबलपुर के बरगी डैम में एक दर्दनाक हादसा हो चुका है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। इसके बावजूद भोपाल के बड़े तालाब पर पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर कोई कड़ाई नहीं दिखाई दे रही है। नियमों की अनदेखी और केवल मुनाफे पर ध्यान केंद्रित करने की यह प्रवृत्ति किसी भी दिन बड़ी जनहानि का कारण बन सकती है। स्थानीय नागरिकों और विशेषज्ञों ने मांग की है कि खराब मौसम के दौरान बोटिंग पर तत्काल रोक लगाने के स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं ताकि दोबारा ऐसी स्थिति पैदा न हो।
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