चिदंबरम की राहत की कोशिश नाकाम, सीबीआई ने अदालत में रखा कड़ा रुख
आइएनएक्स मीडिया मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की याचिका विरोध करते हुए सीबीआइ ने कहा कि चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम के खिलाफ दलीलें सुनने और आरोप तय करने से ट्रायल कोर्ट को नहीं रोका जा सकता है।
आरोप अभी तय नहीं किए गए हैं
जांच एजेंसी ने ट्रायल कोर्ट के समक्ष कार्यवाही स्थगित करने की चिदंबरम की याचिका का विरोध किया। न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की पीठ के समक्ष सीबीआइ के अधिवक्ता ने कहा कि आरोप अभी तय नहीं किए गए हैं और आगे की जांच जारी रह सकती है।
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीबीआइ ने कहा, जब पी चिदंबरम खुद कहते हैं कि आगे की जांच जारी रह सकती है, तो यह याचिका कैसे स्वीकार्य है? कानून कहता है कि बेशक आरोपों पर बहस सुनी जा सकती है और आरोप तय किए जा सकते हैं।
वहीं, चिदंबरम की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने तर्क दिया कि जब तक सीबीआइ की जांच लंबित है, तब तक ट्रायल कोर्ट को निष्पक्ष सुनवाई के हित में न तो दलीलें सुननी चाहिए और न ही आरोप तय किए जाने चाहिए।
आठ साल बाद भी जांच पूरी नहीं हुई है
लूथरा ने कहा कि आरोपितों से कुछ सामग्री इस आधार पर छिपाई गई कि जांच अभी चल रही है और यदि आरोप तय होने के बाद अन्य दोषमुक्ति साक्ष्य बरामद किए गए, तो सीबीआइ का मामला खत्म हो जाएगा। कहा कि सीबीआइ ने 15 मई 2017 को मामला दर्ज किया था। आठ साल बाद भी जांच पूरी नहीं हुई है।
सीबीआइ का आरोप है कि वित्त मंत्री के रूप में चिदंबरम के कार्यकाल के दौरान 2007 में 305 करोड़ रुपये के विदेशी फंड प्राप्त करने के लिए आइएनएक्स मीडिया समूह को दी गई विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) मंजूरी में अनियमितताओं हुई थीं।
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