Emergency पर सियासत तेज, सांसद निशिकांत दुबे ने उठाए गंभीर सवाल
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने शनिवार को आपातकाल (Emergency) के दौर को भारतीय लोकतंत्र का सबसे 'काला अध्याय' करार दिया। उन्होंने तत्कालीन सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उस समय की एक हृदयविदारक घटना को साझा किया। दुबे ने प्रसिद्ध अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहलता रेड्डी की गिरफ्तारी और जेल में उनके साथ हुए अमानवीय व्यवहार का विशेष उल्लेख किया।
सोशल मीडिया पर साधा निशाना
निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए इतिहास के पन्नों को पलटा। उन्होंने लिखा:
-
तारीख और गिरफ्तारी: 2 मई 1976 को तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने दक्षिण भारतीय सिनेमा की दिग्गज कलाकार स्नेहलता रेड्डी को हिरासत में लिया था।
-
वजह: दुबे के अनुसार, उनकी गिरफ्तारी का एकमात्र कारण यह था कि वे दिग्गज नेता जॉर्ज फर्नांडिस की सहयोगी थीं।
-
परिवार पर अत्याचार: उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने स्नेहलता के परिवार को भी नहीं बख्शा। उनके 84 वर्षीय वृद्ध पिता तक को गिरफ्तार कर लिया गया था।
-
जेल की प्रताड़ना: जेल में स्नेहलता रेड्डी को बेहद दयनीय स्थितियों में रखा गया। उन्हें बिना किसी ठोस मुकदमे के महीनों तक कालकोठरी में कैद रहना पड़ा। जनवरी 1977 में जब उनकी तबीयत बहुत बिगड़ गई, तब उन्हें पैरोल पर रिहा किया गया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उनका देहांत हो गया।
कौन थीं स्नेहलता रेड्डी?
स्नेहलता रेड्डी का भारतीय कला और समाज में एक विशिष्ट स्थान था:
-
प्रतिष्ठित कलाकार: 1932 में जन्मी स्नेहलता कन्नड़ और तेलुगु सिनेमा के साथ-साथ थिएटर की एक मशहूर हस्ती थीं।
-
राष्ट्रीय पुरस्कार: उन्होंने कालजयी फिल्म 'संस्कार' में अभिनय किया था, जिसे 1970 में सर्वश्रेष्ठ फिल्म के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया था।
-
मीसा (MISA) का प्रयोग: उन्हें 'आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था कानून' (MISA) के तहत गिरफ्तार किया गया था।
-
बड़ौदा डायनामाइट केस: उन पर बड़ौदा डायनामाइट मामले में शामिल होने का संदेह जताया गया था, हालांकि अंतिम चार्जशीट में उनका नाम कहीं नहीं था। इसके बावजूद, उन्हें आठ महीने तक बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के जेल में प्रताड़ित किया गया।
निशिकांत दुबे का संदेश
सांसद ने कहा कि आपातकाल केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं था, बल्कि यह हजारों निर्दोष लोगों के दमन और मानवाधिकारों के हनन की एक क्रूर गाथा थी। उन्होंने स्नेहलता रेड्डी के उदाहरण के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि सत्ता के दुरुपयोग ने कैसे देश की प्रतिभाओं और उनके परिवारों को तबाह कर दिया था।
3 मई से बदल जाएगा रेल शेड्यूल, यात्रियों को हो सकती है परेशानी
सूर्यवंशी को आंख दिखाना पड़ा भारी! काइल जैमिसन पर BCCI का एक्शन
RBI Governor: इकोनॉमी मजबूत लेकिन कर्ज और महंगाई बढ़ने का खतरा
भारत में Cell Broadcast सेवा शुरू, मोबाइल पर आया सायरन अलर्ट क्यों?
मतगणना पर सियासी घमासान: Suvendu Adhikari ने उठाए सवाल
Weather Update: अगले दो दिनों में बारिश, तापमान में गिरावट संभव
बंगाल में महिलाओं की बंपर वोटिंग, पुरुषों से 2.5% आगे निकलकर बदली सियासत