नस्लवाद के शिकार जोहरान ने जीता न्यूयॉर्क मेयर का डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव
न्यूयॉर्क। न्यूयॉर्क शहर में मेयर चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी अपने चरम पर हैं। भारतीय मूल के जोहरान ममदानी ने डेमोक्रेटिक पार्टी की प्राइमरी जीतकर इतिहास रच दिया है। पूर्व गवर्नर एंड्रयू कुओमो को भारी मतों से हराकर ममदानी अब नवंबर में होने वाले मेयर चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार होंगे। यदि वे यह चुनाव जीतते हैं, तो न्यूयॉर्क शहर के पहले भारतवंशी और मुस्लिम मेयर बनने का गौरव प्राप्त करेंगे। जोहरान ममदानी नस्लीय भेदभाव और सांस्कृतिक पूर्वाग्रहों के शिकार रहे हैं। हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे भारतीय परंपरानुसार हाथ से भोजन करते दिखे। इसके बाद रिपब्लिकन प्रतिनिधि ब्रैंडन गिल ने उन्हें पश्चिमी तौर-तरीके सीखने और अपने पिछड़े देश वापस जाने तक की सलाह दे दी थी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तो ममदानी को कम्युनिस्ट और पागल कहकर आलोचना की और यहां तक कि उनकी नागरिकता पर भी सवाल खड़े कर दिए। इन तीखे हमलों के बावजूद जोहरान ममदानी डटे रहे। उन्होंने कहा, मैं गिरफ्तारी जैसी धमकियों से डरने वाला नहीं हूं। मेरे लिए राजनीति, सेवा और मूल्यों की लड़ाई है।
जोहरान ममदानी, फिल्म निर्देशक मीरा नायर और अफ्रीकी विद्वान महमूद ममदानी के पुत्र हैं। उनका पालन-पोषण विविध संस्कृतियों के संगम में हुआ और वे हमेशा से नस्लवाद, रंगभेद और सामाजिक असमानता के विरुद्ध खड़े रहे हैं। उनके पिता महमूद ममदानी ने अफ्रीका और भारत में उपनिवेशवाद और नस्लभेद पर गहन लेखन किया है। उनकी मां मीरा नायर की फिल्में भी हमेशा हाशिए पर खड़े समुदायों की आवाज़ रही हैं। जोहरान की जीत न केवल उनके लिए बल्कि अमेरिका में प्रवासी समुदायों के लिए एक बड़ा प्रतीकात्मक संदेश है। यह दर्शाता है कि विविधता और समानता की आवाज़ को भी सत्ता की राह मिल सकती है। अब 4 नवंबर 2025 को आम चुनाव होंगे, जहां ममदानी की टक्कर रिपब्लिकन उम्मीदवार से होगी। अगर वह चुनाव जीत जाते हैं तो यह इतिहास में दर्ज हो जाएगा। फिलहाल जोहरान की जीत न केवल एक राजनीतिक विजय है, बल्कि यह उन सांस्कृतिक, नस्लीय और सामाजिक संघर्षों के खिलाफ एक मजबूत जवाब है, जो प्रवासी और अल्पसंख्यक समुदाय दशकों से झेलते आ रहे हैं। अब सबकी निगाहें नवंबर में होने वाले मुख्य चुनाव पर टिकी हैं।
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