रायपुर डायरीज: पैकेजिंग सामग्री के दाम बढ़ने से छत्तीसगढ़ के 200 उद्योगों पर संकट
रायपुर: वैश्विक तनाव की मार, प्लास्टिक और पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में लगी आग
रायपुर: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव ने अब छत्तीसगढ़ के बाजारों और उद्योगों की चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कीमतों में आई भारी उछाल का सबसे बुरा असर प्लास्टिक उद्योग पर पड़ा है। रायपुर समेत प्रदेशभर में प्लास्टिक से बने रोजमर्रा के सामान और पैकेजिंग सामग्री के दाम आसमान छू रहे हैं।
दोगुने हुए कच्चे माल के दाम कारोबारियों के मुताबिक, प्लास्टिक उद्योग का आधार माना जाने वाला 'प्लास्टिक दाना' और स्क्रैप अब काफी महंगा हो गया है:
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प्लास्टिक दाना: पहले जो 100 रुपये प्रति किलो था, वह अब 180 से 200 रुपये तक पहुंच गया है।
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प्लास्टिक स्क्रैप: 70-80 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 120-130 रुपये प्रति किलो हो गया है।
पैकेजिंग और खाद्य उत्पादों पर असर कच्चा तेल महंगा होने से एथिलीन और प्रोपलीन जैसे पेट्रोकेमिकल्स की लागत बढ़ गई है। इसका सीधा असर दूध, दही, तेल और नमकीन की पैकिंग पर पड़ा है:
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प्रिंटिंग पाउच: नमकीन आदि की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाला पाउच 200 रुपये से बढ़कर अब 300 रुपये प्रति किलो हो गया है।
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प्लास्टिक पन्नी: 120 रुपये वाली पन्नी अब 200 रुपये तक बिक रही है।
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खाद्य तेल: एक लीटर तेल की पैकिंग लागत 1 रुपये से बढ़कर 2 रुपये हो गई है, जिससे खाने के तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।
उद्योगों के बंद होने का खतरा छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष सतीश थौरानी ने बताया कि प्रदेश के करीब 200 छोटे-बड़े उद्योग इस संकट की चपेट में हैं। उत्पादन लागत बढ़ने से कई इकाइयां बंद होने की कगार पर हैं। चैंबर ने सरकार से मांग की है कि इन उद्योगों को बचाने के लिए विशेष सब्सिडी या राहत पैकेज की घोषणा की जाए।
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